Saturday, 26 July 2014

गुरु पूर्णिमा

गुरु पूर्णिमा। भारतीय संस्कृति का एक सुंदर दिन। यह दिन गुरु को समर्पित है। यह गुरु के प्रति कृतज्ञता और अहोभाव प्रकट करने का दिन है। भारतीय परंपरा में गुरु का स्थान भगवान से भी ऊंचा माना गया है। लेकिन आज जहां इतने तरह के गोरखधंधे हैं और जीवन एक लंबी भागदौड़ बन गया है, ऐसे में लोगों को गुरु की कम, 'गॉडफादर' की ज्यादा जरूरत होती है। आसाराम बापू जैसे प्रकरण के बाद गुरु शब्द की चमक और महत्ता भी कम हुई है। अब तो हिमालय में भी गुरु कम, 'गुरुघंटाल' ज्यादा दिखाई देते हैं। लेकिन सवाल ये है कि क्या एक गुरु के बिना जीवन की सफलता, सौंदर्य और सार्थकता की कल्पना की जा सकती है? क्या 'गॉडफादर' से गुरु की भरपाई हो पाएगी ? क्या 'गॉडफादर' और 'गुरुघंटाल' जैसे कलात्मक विकल्प उपलब्ध होने से हमें गुरु की जरूरत नहीं होगी?

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