दोष / गलती / त्रुटि
गलती करने में कोई
गलती नहीं है ।
गलती करने से डरना
सबसे बडी गलती है ।
— एल्बर्ट हब्बार्ड
— एल्बर्ट हब्बार्ड
गलती करने का सीधा सा
मतलब है कि आप तेजी से सीख रहे हैं ।
बहुत सी तथा बदी
गलतियाँ किये बिना कोई बडा आदमी नहीं बन सकता ।
— ग्लेडस्टन
— ग्लेडस्टन
मैं इसलिये आगे निकल
पाया कि मैने उन लोगों से ज्यादा गलतियाँ की जिनका मानना था कि गलती करना बुरा था , या गलती करने
का मतलब था कि वे मूर्ख थे ।
— राबर्ट कियोसाकी
— राबर्ट कियोसाकी
सीधे तौर पर अपनी गलतियों
को ही हम अनुभव का नाम दे देते हैं ।
— आस्कर वाइल्ड
— आस्कर वाइल्ड
गलती तो हर मनुष्य कर
सकता है , पर केवल मूर्ख
ही उस पर दृढ बने रहते हैं ।
— सिसरो
— सिसरो
अपनी गलती स्वीकार कर
लेने में लज्जा की कोई बात नहीं है । इससे दूसरे शब्दों में यही प्रमाणित होता है
कि कल की अपेक्षा आज आप अधिक समझदार हैं ।
— अलेक्जेन्डर पोप
— अलेक्जेन्डर पोप
दोष निकालना सुगम है , उसे ठीक करना
कठिन ।
— प्लूटार्क
— प्लूटार्क
त्रुटियों के बीच में
से ही सम्पूर्ण सत्य को ढूंढा जा सकता है |
-– सिगमंड फ्रायड
-– सिगमंड फ्रायड
गलतियों से भरी जिंदगी
न सिर्फ सम्मनाननीय बल्कि लाभप्रद है उस जीवन से जिसमे कुछ किया ही नही गया।
अनुभव / अभ्यास
बिना अनुभव कोरा
शाब्दिक ज्ञान अंधा है.
करत करत अभ्यास के जड़
मति होंहिं सुजान।
रसरी आवत जात ते सिल पर परहिं निशान।।
— रहीम
रसरी आवत जात ते सिल पर परहिं निशान।।
— रहीम
अनभ्यासेन विषं विद्या
।
( बिना अभ्यास के विद्या कठिन है / बिना अभ्यास के विद्या विष के समान है ( ?) )
( बिना अभ्यास के विद्या कठिन है / बिना अभ्यास के विद्या विष के समान है ( ?) )
यह रहीम निज संग लै , जनमत जगत न
कोय ।
बैर प्रीति अभ्यास जस , होत होत ही होय ॥
बैर प्रीति अभ्यास जस , होत होत ही होय ॥
अनुभव-प्राप्ति के लिए
काफी मूल्य चुकाना पड़ सकता है पर उससे जो शिक्षा मिलती है वह और कहीं नहीं मिलती
।
— अज्ञात
— अज्ञात
अनुभव की पाठशाला में
जो पाठ सीखे जाते हैं, वे पुस्तकों
और विश्वविद्यालयों में नहीं मिलते ।
–अज्ञात
–अज्ञात
सफलता, असफलता
असफलता यह बताती है कि
सफलता का प्रयत्न पूरे मन से नहीं किया
गया ।
— श्रीरामशर्मा आचार्य
गया ।
— श्रीरामशर्मा आचार्य
जीवन के आरम्भ में ही
कुछ असफलताएँ मिल जाने का बहुत अधिक व्यावहारिक महत्व है ।
— हक्सले
— हक्सले
जो कभी भी कहीं असफल
नही हुआ वह आदमी महान नही हो सकता ।
— हर्मन मेलविल
— हर्मन मेलविल
असफलता आपको महान
कार्यों के लिये तैयार करने की प्रकृति की योजना है ।
— नैपोलियन हिल
— नैपोलियन हिल
सफलता की सभी कथायें
बडी-बडी असफलताओं की कहानी हैं ।
असफलता फिर से अधिक
सूझ-बूझ के साथ कार्य आरम्भ करने का एक मौका मात्र है ।
— हेनरी फ़ोर्ड
— हेनरी फ़ोर्ड
दो ही प्रकार के
व्यक्ति वस्तुतः जीवन में असफल होते है - एक तो वे जो सोचते हैं, पर उसे कार्य
का रूप नहीं देते और दूसरे वे जो कार्य-रूप में परिणित तो कर देते हैं पर सोचते
कभी नहीं।
- थामस इलियट
- थामस इलियट
दूसरों को असफल करने
के प्रयत्न ही में हमें असफल बनाते हैं।
- इमर्सन
- हरिशंकर परसाई
- इमर्सन
- हरिशंकर परसाई
किसी दूसरे द्वारा
रचित सफलता की परिभाषा को अपना मत समझो ।
जीवन में दो ही
व्यक्ति असफल होते हैं । पहले वे जो सोचते हैं पर करते नहीं , दूसरे वे जो
करते हैं पर सोचते नहीं ।
— श्रीराम शर्मा , आचार्य
— श्रीराम शर्मा , आचार्य
प्रत्येक व्यक्ति को
सफलता प्रिय है लेकिन सफल व्यक्तियों से सभी लोग घृणा करते हैं ।
— जान मैकनरो
— जान मैकनरो
असफल होने पर , आप को निराशा
का सामना करना पड़ सकता है। परन्तु , प्रयास छोड़
देने पर , आप की असफलता
सुनिश्चित है।
— बेवेरली सिल्स
— बेवेरली सिल्स
सफलता का कोई गुप्त
रहस्य नहीं होता. क्या आप किसी सफल आदमी को जानते हैं जिसने अपनी सफलता का बखान
नहीं किया हो.
-– किन हबार्ड
-– किन हबार्ड
मैं सफलता के लिए
इंतजार नहीं कर सकता था, अतएव उसके
बगैर ही मैं आगे बढ़ चला.
-– जोनाथन विंटर्स
-– जोनाथन विंटर्स
हार का स्वाद मालूम
हो तो जीत हमेशा मीठी लगती है.
— माल्कम फोर्बस
— माल्कम फोर्बस
हम सफल होने को पैदा
हुए हैं, फेल होने के लिये नही .
— हेनरी डेविड
— हेनरी डेविड
पहाड़ की चोटी पर
पंहुचने के कई रास्ते होते हैं लेकिन व्यू सब जगह से एक सा दिखता है .
— चाइनीज कहावत
— चाइनीज कहावत
यहाँ दो तरह के लोग
होते हैं - एक वो जो काम करते हैं और दूसरे वो जो सिर्फ क्रेडिट लेने की सोचते है।
कोशिश करना
कि तुम पहले समूह में रहो क्योंकि वहाँ कम्पटीशन कम है .
— इंदिरा गांधी
कि तुम पहले समूह में रहो क्योंकि वहाँ कम्पटीशन कम है .
— इंदिरा गांधी
सफलता के लिये कोई
लिफ्ट नही जाती इसलिये सीढ़ीयों से ही जाना पढ़ेगा
हम हवा का रूख तो नही
बदल सकते लेकिन उसके अनुसार अपनी नौका के पाल की दिशा जरूर बदल सकते हैं।
सफलता सार्वजनिक उत्सव
है , जबकि असफलता
व्यक्तिगत शोक ।
मैं नही जानता कि
सफलता की सीढी क्या है ; असफला की सीढी
है , हर किसी को
प्रसन्न करने की चाह ।
— बिल कोस्बी
— बिल कोस्बी
सफलता के तीन रहस्य
हैं - योग्यता , साहस और कोशिश
।
सुख-दुःख , व्याधि , दया
संसार में सब से अधिक
दुःखी प्राणी कौन है ? बेचारी
मछलियां क्योंकि दुःख के कारण उनकी आंखों में आनेवाले आंसू पानी में घुल जाते हैं, किसी को दिखते
नहीं। अतः वे सारी सहानुभूति और स्नेह से वंचित रह जाती हैं। सहानुभूति के अभाव
में तो कण मात्र दुःख भी पर्वत हो जाता है।
- खलील जिब्रान
- खलील जिब्रान
संसार में प्रायः सभी जन
सुखी एवं धनशाली मनुष्यों के शुभेच्छु हुआ करते हैं। विपत्ति में पड़े मनुष्यों के
प्रियकारी दुर्लभ होते हैं।
- मृच्छकटिक
- मृच्छकटिक
व्याधि शत्रु से भी
अधिक हानिकारक होती है।
- चाणक्यसूत्राणि-२२३
- चाणक्यसूत्राणि-२२३
विपत्ति में पड़े हुए
का साथ बिरला ही कोई देता है।
- रावणार्जुनीयम्-५।८
- रावणार्जुनीयम्-५।८
मनुष्य के जीवन में दो
तरह के दुःख होते हैं - एक यह कि उसके जीवन की अभिलाषा पूरी नहीं हुई और दूसरा यह
कि उसके जीवन की अभिलाषा पूरी हो गई।
- बर्नार्ड शॉ
- बर्नार्ड शॉ
मेरी हार्दिक इच्छा है
कि मेरे पास जो भी थोड़ा-बहुत धन शेष है, वह सार्वजनिक
हित के कामों में यथाशीघ्र खर्च हो जाए। मेरे अंतिम समय में एक पाई भी न बचे, मेरे लिए सबसे
बड़ा सुख यही होगा।
- पुरुषोत्तमदास टंडन
- पुरुषोत्तमदास टंडन
मानवजीवन में दो और दो
चार का नियम सदा लागू होता है। उसमें कभी दो और दो पांच हो जाते हैं। कभी ऋण तीन
भी और कई बार तो सवाल पूरे होने के पहले ही स्लेट गिरकर टूट जाती है।
- सर विंस्टन चर्चिल
- सर विंस्टन चर्चिल
तपाया और जलाया जाता
हुआ लौहपिण्ड दूसरे से जुड़ जाता है, वैसे ही दुख
से तपते मन आपस में निकट आकर जुड़ जाते हैं।
-लहरीदशक
-लहरीदशक
रहिमन बिपदा हुँ भली , जो थोरे दिन
होय ।
हित अनहित वा जगत में , जानि परत सब कोय ॥
— रहीम
हित अनहित वा जगत में , जानि परत सब कोय ॥
— रहीम
चाहे राजा हो या किसान , वह सबसे
ज्यादा सुखी है जिसको अपने घर में शान्ति प्राप्त होती है ।
— गेटे
— गेटे
अरहर की दाल औ जड़हन
का भात
गागल निंबुआ औ घिउ तात
सहरसखंड दहिउ जो होय
बाँके नयन परोसैं जोय
कहै घाघ तब सबही झूठा
उहाँ छाँड़ि इहवैं बैकुंठा
—–घाघ
गागल निंबुआ औ घिउ तात
सहरसखंड दहिउ जो होय
बाँके नयन परोसैं जोय
कहै घाघ तब सबही झूठा
उहाँ छाँड़ि इहवैं बैकुंठा
—–घाघ
प्रशंसा / प्रोत्साहन
उष्ट्राणां विवाहेषु , गीतं गायन्ति
गर्दभाः ।
परस्परं प्रशंसन्ति , अहो रूपं अहो ध्वनिः ।
( ऊँटों के विवाह में गधे गीत गा रहे हैं । एक-दूसरे की प्रशंसा कर रहे हैं , अहा ! क्या रूप है ? अहा ! क्या आवाज है ? )
परस्परं प्रशंसन्ति , अहो रूपं अहो ध्वनिः ।
( ऊँटों के विवाह में गधे गीत गा रहे हैं । एक-दूसरे की प्रशंसा कर रहे हैं , अहा ! क्या रूप है ? अहा ! क्या आवाज है ? )
मानव में जो कुछ
सर्वोत्तम है उसका विकास प्रसंसा तथा प्रोत्साहन से किया जा सकता है ।
–चार्ल्स श्वेव
–चार्ल्स श्वेव
आप हर इंसान का चरित्र
बता सकते हैं यदि आप देखें कि वह प्रशंसा से कैसे प्रभावित होता है ।
— सेनेका
— सेनेका
मानव प्रकृति में सबसे
गहरा नियम प्रशंसा प्राप्त करने की लालसा है ।
— विलियम जेम्स
— विलियम जेम्स
अगर किसी युवती के दोष
जानने हों तो उसकी सखियों में उसकी प्रसंसा करो ।
— फ्रंकलिन
— फ्रंकलिन
चापलूसी करना सरल है , प्रशंसा करना
कठिन ।
मेरी चापलूसी करो, और मैं आप पर
भरोसा नहीं करुंगा. मेरी आलोचना करो, और मैं आपको
पसंद नहीं करुंगा. मेरी उपेक्षा करो, और मैं आपको
माफ़ नहीं करुंगा. मुझे प्रोत्साहित करो, और मैं कभी
आपको नहीं भूलूंगा
-– विलियम ऑर्थर वार्ड
-– विलियम ऑर्थर वार्ड
हमारे साथ प्रायः
समस्या यही होती है कि हम झूठी प्रशंसा के द्वारा बरबाद हो जाना तो पसंद करते हैं, परंतु
वास्तविक आलोचना के द्वारा संभल जाना नहीं |
-– नॉर्मन विंसेंट पील
-– नॉर्मन विंसेंट पील
मान , अपमान , सम्मान
धूल भी पैरों से रौंदी
जाने पर ऊपर उठती है, तब जो मनुष्य
अपमान को सहकर भी स्वस्थ रहे, उससे तो वह
पैरों की धूल ही अच्छी।
- माघकाव्य
- माघकाव्य
इतिहास इस बात का
साक्षी है कि किसी भी व्यक्ति को केवल उसकी उपलब्धियों के लिए सम्मानित नहीं किया
जाता। समाज तो उसी का सम्मान करता है, जिससे उसे कुछ
प्राप्त होता है।
- कल्विन कूलिज
- कल्विन कूलिज
अपमानपूर्वक अमृत पीने
से तो अच्छा है सम्मानपूर्वक विषपान |
-– रहीम
-– रहीम
अपमान और दवा की
गोलियां निगल जाने के लिए होती हैं, मुंह में रखकर
चूसते रहने के लिए नहीं।
- वक्रमुख
- वक्रमुख
गाली सह लेने के असली
मायने है गाली देनेवाले के वश में न होना, गाली देनेवाले
को असफल बना देना। यह नहीं कि जैसा वह कहे, वैसा कहना।
- महात्मा गांधी
- महात्मा गांधी
मान सहित विष खाय के , शम्भु भये
जगदीश ।
बिना मान अमृत पिये , राहु कटायो शीश ॥
— कबीर
बिना मान अमृत पिये , राहु कटायो शीश ॥
— कबीर
अभिमान / घमण्ड / गर्व
जब मैं था तब हरि नहीं , अब हरि हैं मै
नाहि ।
सब अँधियारा मिट गया दीपक देख्या माँहि ॥
— कबीर
सब अँधियारा मिट गया दीपक देख्या माँहि ॥
— कबीर
धन / अर्थ / अर्थ महिमा /
अर्थ निन्दा / अर्थ शास्त्र /सम्पत्ति / ऐश्वर्य
दान , भोग और नाश ये
धन की तीन गतियाँ हैं । जो न देता है और न ही भोगता है, उसके धन की
तृतीय गति ( नाश ) होती है ।
— भर्तृहरि
— भर्तृहरि
हिरण्यं एव अर्जय , निष्फलाः कलाः
। ( सोना ( धन ) ही कमाओ , कलाएँ निष्फल
है )
— महाकवि माघ
— महाकवि माघ
सर्वे गुणाः कांचनं
आश्रयन्ते । ( सभी गुण सोने का ही सहारा लेते हैं )
- भर्तृहरि
- भर्तृहरि
संसार के व्यवहारों के
लिये धन ही सार-वस्तु है । अत: मनुष्य को उसकी प्राप्ति के लिये युक्ति एवं साहस
के साथ यत्न करना चाहिये ।
— शुक्राचार्य
— शुक्राचार्य
आर्थस्य मूलं राज्यम्
। ( राज्य धन की जड है )
— चाणक्य
— चाणक्य
मनुष्य मनुष्य का दास
नही होता , हे राजा , वह् तो धन का
दास् होता है ।
— पंचतंत्र
— पंचतंत्र
अर्थो हि लोके
पुरुषस्य बन्धुः । ( संसार मे धन ही आदमी का भाई है )
— चाणक्य
— चाणक्य
जहाँ सुमति तँह सम्पति
नाना, जहाँ कुमति तँह बिपति निधाना ।
— गो. तुलसीदास
— गो. तुलसीदास
क्षणशः कण्शश्चैव
विद्याधनं अर्जयेत ।
( क्षण-ख्षण करके विद्या और कण-कण करके धन का अर्जन करना चाहिये ।
( क्षण-ख्षण करके विद्या और कण-कण करके धन का अर्जन करना चाहिये ।
रुपए ने कहा, मेरी फिक्र न
कर – पैसे की
चिन्ता कर.
-– चेस्टर फ़ील्ड
-– चेस्टर फ़ील्ड
बढ़त बढ़त सम्पति सलिल
मन सरोज बढ़ि जाय।
घटत घटत पुनि ना घटै तब समूल कुम्हिलाय।।
——(मुझे याद नहीं)
घटत घटत पुनि ना घटै तब समूल कुम्हिलाय।।
——(मुझे याद नहीं)
जहां मूर्ख नहीं पूजे
जाते, जहां अन्न की सुरक्षा की जाती है और जहां परिवार में कलह
नहीं होती, वहां लक्ष्मी निवास करती है ।
–अथर्ववेद
–अथर्ववेद
मुक्त बाजार ही
संसाधनों के बटवारे का सवाधिक दक्ष और सामाजिक रूप से इष्टतम तरीका है ।
स्वार्थ या लाभ ही
सबसे बडा उत्साहवर्धक ( मोटिवेटर ) या आगे बढाने वाला बल है ।
मुक्त बाजार
उत्तरदायित्वों के वितरण की एक पद्धति है ।
सम्पत्ति का अधिकार
प्रदान करने से सभ्यता के विकास को जितना योगदान मिला है उतना मनुष्य द्वारा
स्थापित किसी दूसरी संस्था से नहीं ।
यदि किसी कार्य को
पर्याप्त रूप से छोटे-छोटे चरणों मे बाँट दिया जाय तो कोई भी काम पूरा किया जा
सकता है ।
धनी / निर्धन / गरीब /
गरीबी
गरीब वह है जिसकी
अभिलाषायें बढी हुई हैं ।
— डेनियल
— डेनियल
गरीबों के बहुत से
बच्चे होते हैं , अमीरों के
सम्बन्धी.
-– एनॉन
-– एनॉन
पैसे की कमी समस्त
बुराईयों की जड़ है।
कुबेर भी यदि आय से
अधिक व्यय करे तो निर्धन हो जाता है |
– चाणक्य
– चाणक्य
निर्धनता से मनुष्य मे
लज्जा आती है । लज्जा से आदमी तेजहीन हो जाता है । निस्तेज मनुष्य का समाज
तिरस्कार करता है । तिरष्कृत मनुष्य में वैराग्य भाव उत्पन्न हो जाते हैं और तब
मनुष्य को शोक होने लगता है । जब मनुष्य शोकातुर होता है तो उसकी बुद्धि क्षीण
होने लगती है और बुद्धिहीन मनुष्य का सर्वनाश हो जाता है ।
— वासवदत्ता , मृच्छकटिकम में
— वासवदत्ता , मृच्छकटिकम में
गरीबी दैवी अभिशाप
नहीं बल्कि मानवरचित षडयन्त्र है ।
— महात्मा गाँधी
— महात्मा गाँधी
व्यापार
व्यापारे वसते लक्ष्मी
। ( व्यापार में ही लक्ष्मी वसती हैं )
महाजनो येन गतः स
पन्थाः ।
( महापुरुष जिस मार्ग से गये है, वही (उत्तम) मार्ग है )
( व्यापारी वर्ग जिस मार्ग से गया है, वही ठीक रास्ता है )
( महापुरुष जिस मार्ग से गये है, वही (उत्तम) मार्ग है )
( व्यापारी वर्ग जिस मार्ग से गया है, वही ठीक रास्ता है )
जब गरीब और धनी आपस
में व्यापार करते हैं तो धीरे-धीरे उनके जीवन-स्तर में समानता आयेगी ।
— आदम स्मिथ , “द वेल्थ आफ नेशन्स” में
— आदम स्मिथ , “द वेल्थ आफ नेशन्स” में
तकनीक और व्यापार का
नियंत्रण ब्रिटिश साम्राज्य का अधारशिला थी ।
राष्ट्रों का कल्याण
जितना मुक्त व्यापार पर निर्भर है उतना ही मैत्री , इमानदारी और
बराबरी पर ।
— कार्डेल हल्ल
— कार्डेल हल्ल
व्यापारिक युद्ध , विश्व युद्ध , शीत युद्ध : इस बात की
लडाई कि “गैर-बराबरी पर आधारित व्यापार के नियम” कौन बनाये ।
इससे कोई फ़र्क नहीं
पडता कि कौन शाशन करता है , क्योंकि सदा
व्यापारी ही शाशन चलाते हैं ।
— थामस फुलर
— थामस फुलर
आज का व्यापार सायकिल
चलाने जैसा है - या तो आप चलाते रहिये या गिर जाइये ।
कार्पोरेशन : व्यक्तिगत
उत्तर्दायित्व के बिना ही लाभ कमाने की एक चालाकी से भरी युक्ति ।
— द डेविल्स डिक्शनरी
— द डेविल्स डिक्शनरी
अपराधी, दस्यु प्रवृति
वाला एक ऐसा व्यक्ति है जिसके पास कारपोरेशन शुरू करने के लिये पर्याप्त पूँजी
नहीं है ।
विकास / प्रगति / उन्नति
बीज आधारभूत कारण है , पेड उसका
प्रगति परिणाम । विचारों की प्रगतिशीलता और उमंग भरी साहसिकता उस बीज के समान हैं
।
— श्रीराम शर्मा , आचार्य
— श्रीराम शर्मा , आचार्य
विकास की कोई सीमा नही
होती, क्योंकि मनुष्य की मेधा, कल्पनाशीलता
और कौतूहूल की भी कोई सीमा नही है।
— रोनाल्ड रीगन
— रोनाल्ड रीगन
अगर चाहते सुख समृद्धि, रोको जनसंख्या
वृद्धि.
नारी की उन्नति पर ही
राष्ट्र की उन्नति निर्धारित है.
भारत को अपने अतीत की
जंज़ीरों को तोड़ना होगा। हमारे जीवन पर मरी हुई, घुन लगी
लकड़ियों का ढेर पहाड़ की तरह खड़ा है। वह सब कुछ बेजान है जो मर चुका है और अपना
काम खत्म कर चुका है, उसको खत्म हो
जाना, उसको हमारे जीवन से निकल जाना है लेकिन इसका मतलब यह नहीं
है कि हम अपने आपको हर उस दौलत से काट लें, हर उस चीज़ को
भूल जायें जिसने अतीत में हमें रोशनी और शक्ति दी और हमारी ज़िंदगी को जगमगाया।
- जवाहरलाल नेहरू
- जवाहरलाल नेहरू
सब से अधिक आनंद इस
भावना में है कि हमने मानवता की प्रगति में कुछ योगदान दिया है। भले ही वह कितना
कम, यहां तक कि बिल्कुल ही तुच्छ क्यों न हो?
- डा. राधाकृष्णन
- डा. राधाकृष्णन
राजनीति / शाशन / सरकार
सामर्थ्य्मूलं
स्वातन्त्र्यं , श्रममूलं च
वैभवम् ।
न्यायमूलं सुराज्यं स्यात् , संघमूलं महाबलम् ॥
( शक्ति स्वतन्त्रता की जड है , मेहनत धन-दौलत की जड है , न्याय सुराज्य का मूल होता है और संगठन महाशक्ति की जड है । )
न्यायमूलं सुराज्यं स्यात् , संघमूलं महाबलम् ॥
( शक्ति स्वतन्त्रता की जड है , मेहनत धन-दौलत की जड है , न्याय सुराज्य का मूल होता है और संगठन महाशक्ति की जड है । )
निश्चित ही राज्य तीन
शक्तियों के अधीन है । शक्तियाँ मंत्र , प्रभाव और
उत्साह हैं जो एक दूसरे से लाभान्वित होकर कर्तव्यों के क्षेत्र में प्रगति करती
हैं । मंत्र ( योजना , परामर्श ) से
कार्य का ठीक निर्धारण होता है , प्रभाव (
राजोचित शक्ति , तेज ) से
कार्य का आरम्भ होता है और उत्साह ( उद्यम ) से कार्य सिद्ध होता है ।
— दसकुमारचरित
— दसकुमारचरित
यथार्थ को स्वीकार न
करनें में ही व्यावहारिक राजनीति निहित है ।
— हेनरी एडम
— हेनरी एडम
विपत्तियों को खोजने , उसे सर्वत्र
प्राप्त करने , गलत निदान
करने और अनुपयुक्त चिकित्सा करने की कला ही राजनीति है ।
— सर अर्नेस्ट वेम
— सर अर्नेस्ट वेम
मानव स्वभाव का ज्ञान
ही राजनीति-शिक्षा का आदि और अन्त है ।
— हेनरी एडम
— हेनरी एडम
राजनीति में किसी भी
बात का तब तक विश्वास मत कीजिए जब तक कि उसका खंडन आधिकारिक रूप से न कर दिया गया
हो.
-– ओटो वान बिस्मार्क
-– ओटो वान बिस्मार्क
सफल क्रांतिकारी , राजनीतिज्ञ
होता है ; असफल अपराधी.
-– एरिक फ्रॉम
-– एरिक फ्रॉम
दंड द्वारा प्रजा की
रक्षा करनी चाहिये लेकिन बिना कारण किसी को दंड नहीं देना चाहिये ।
— रामायण
— रामायण
प्रजा के सुख में ही
राजा का सुख और प्रजा के हित में ही राजा को अपना हित समझना चाहिये । आत्मप्रियता
में राजा का हित नहीं है, प्रजा की
प्रियता में ही राजा का हित है।
— चाणक्य
— चाणक्य
वही सरकार सबसे अच्छी
होती है जो सबसे कम शाशन करती है ।
सरकार चाहे किसी की हो , सदा बनिया ही
शाशन करते हैं ।
पण्डित / मूर्ख / विज्ञ /
प्रज्ञ / मतिमान /
झटिति पराशयवेदिनो हि
विज्ञाः ।
( जो झट से दूसरे का आशय जान ले वही बुद्धिमान है । )
( जो झट से दूसरे का आशय जान ले वही बुद्धिमान है । )
सुख दुख या संसार में , सब काहू को
होय ।
ज्ञानी काटै ज्ञान से , मूरख काटै रोय ॥
ज्ञानी काटै ज्ञान से , मूरख काटै रोय ॥
आत्मवत सर्वभूतेषु यः
पश्यति सः पण्डितः ।
( जो सारे प्राणियों को अपने समान देखता है , वही पण्डित है । )
( जो सारे प्राणियों को अपने समान देखता है , वही पण्डित है । )
ज्ञानी आदमी के खोखले
ज्ञान से सावधान, वह अज्ञान से
भी ज्यादा खतरनाक है।
- बर्नारड शा
- बर्नारड शा
सब तै भले बिमूढ़, जिन्हैं न
ब्यापै जगत गति
——-गोस्वामी तुलसीदास
——-गोस्वामी तुलसीदास
जाकी जैसी बुद्धि है , वैसी कहे बनाय
।
उसको बुरा न मानिये , बुद्धि कहाँ से लाय ॥
— रहीम
उसको बुरा न मानिये , बुद्धि कहाँ से लाय ॥
— रहीम
सर्दी-गर्मी, भय-अनुराग, सम्पती अथवा
दरिद्रता ये जिसके कार्यो मे बाधा नही डालते वही ज्ञानवान (विवेकशील) कहलाता है ।
सबसे अधिक ज्ञानी वही
है जो अपनी कमियों को समझकर उनका सुधार कर सकता हो। -अज्ञात
बिना कारण कलह कर
बैठना मूर्ख का लक्षण हैं। इसलिए बुद्धिमत्ता इसी में है कि अपनी हानि सह ले लेकिन
विवाद न करे ।
–हितोपदेश
–हितोपदेश
सज्जन / साधु / महापुरुष
/ दुर्जन / खल / दुष्ट / शठ
साधु ऐसा चाहिये , जैसा सूप
सुभाय ।
सार सार को गहि रहै , थोथा देय उडाय ॥
— कबीर
सार सार को गहि रहै , थोथा देय उडाय ॥
— कबीर
शठे शाठ्यं समाचरेत् ।
( दुष्ट के साथ दुष्टता बरतनी चाहिये )
— चाणक्य
( दुष्ट के साथ दुष्टता बरतनी चाहिये )
— चाणक्य
बुरे आदमी के साथ भी
भलाई करनी चाहिए – कुत्ते को
रोटी का एक टुकड़ा डालकर उसका मुंह बन्द करना ही अच्छा है |
– शेख सादी
– शेख सादी
महान पुरुष की पहली
पहचान उसकी विनम्रता है.
भरे बादल और फले वृक्ष
नीचे झुकरे है , सज्जन ज्ञान
और धन पाकर विनम्र बनते हैं.
चापलूसी का ज़हरीला
प्याला आपको तब तक नुकसान नहीं पहुंचा सकता, जब तक कि आपके
कान उसे अमृत समझकर पी न जाएं।
- प्रेमचन्द
- प्रेमचन्द
जो दुष्ट का सत्कार
करता है वह मानो आकाश में बीज बोता है, हवा में सुंदर
चित्र बनाता है और पानी में रेखा खींचता है।
- प्रास्ताविकविलास
- प्रास्ताविकविलास
जिस प्रकार राख से सना
हाथ जैसे-जैसे दर्पण पर घिसा जाता है, वैसे-वैसे
उसके प्रतिबिंब को साफ करता है, उसी प्रकार
दुष्ट जैसे-जैसे सज्जन का अनादर करता है, वैसे-वैसे वह
उसकी कांति को बढ़ाता है।
- वासवदत्ता
- वासवदत्ता
झूठा मीठे बचन कहि रिन
उधार लै जाय
लेत परम सुख ऊपजै लै के दियो न जाय
लै के दियो न जाय ऊंच अरू नीच बतावै
रिन उधार की रीति माँगते मारन धावै
कह गिरधर कविराय रहै वो मन में रूठा
बहुत दिना होइ जायँ कहै तेरो कागद झूठा
—–गिरधर
लेत परम सुख ऊपजै लै के दियो न जाय
लै के दियो न जाय ऊंच अरू नीच बतावै
रिन उधार की रीति माँगते मारन धावै
कह गिरधर कविराय रहै वो मन में रूठा
बहुत दिना होइ जायँ कहै तेरो कागद झूठा
—–गिरधर
भले भलाइहिं सों लहहिं, लहहिं
निचाइहिं नीच।
सुधा सराहिय अमरता, गरल सराहिय मीच।।
——गोस्वामी तुलसीदास
सुधा सराहिय अमरता, गरल सराहिय मीच।।
——गोस्वामी तुलसीदास
रहिमन वहाँ न जाइये , जहाँ कपट को
हेत ।
हम तो ढारत ढेकुली , सींचत आपनो खेत ॥
( ढेंकुली = कुँए से पानी निकालने का बर्तन )
हम तो ढारत ढेकुली , सींचत आपनो खेत ॥
( ढेंकुली = कुँए से पानी निकालने का बर्तन )
रहिमन ओछे नरन सों , बैर भली ना
प्रीति ।
काटे चाटे श्वान के , दोऊ भाँति बिपरीत ॥
काटे चाटे श्वान के , दोऊ भाँति बिपरीत ॥
सांप के दांत में विष
रहता है, मक्खी के सिर में और बिच्छू की पूंछ में किन्तु दुर्जन के
पूरे शरीर में विष रहता है ।
–कबीर
–कबीर
कुटिल लोगों के प्रति
सरल व्यवहार अच्छी नीति नहीं ।
— श्री हर्ष
— श्री हर्ष
विवेक
विवेक , बुद्धि की
पूर्णता है । जीवन के सभी कर्तव्यों में वह हमारा पथ-प्रदर्शक है ।
— ब्रूचे
— ब्रूचे
विवेक की सबसे
प्रत्यक्ष पहचान , सतत प्रसन्नता
है ।
— मान्तेन
— मान्तेन
तुलसी असमय के सखा , धीरज धर्म
विवेक ।
साहित साहस सत्यव्रत , राम भरोसो एक ॥
साहित साहस सत्यव्रत , राम भरोसो एक ॥
ज्ञान भूत है , विवेक भविष्य ।
जो व्यक्ति विवेक के
नियम को तो सीख लेता है पर उन्हें अपने जीवन में नहीं उतारता वह ठीक उस किसान की
तरह है, जिसने अपने खेत में मेहनत तो की पर बीज बोये ही नहीं।
- शेख सादी
- शेख सादी
भविष्य / भविष्य वाणी
अनागतविधाता च
प्रत्युत्पन्नमतिस्तथा ।
द्वावेतो सुखमेधते , यदभविष्यो विनश्यति ॥
— पंचतन्त्र
भविष्य का निर्माण करने वाला और प्रत्युत्पन्नमति ( हाजिर जबाब ) ये दोनो सुख भोगते हैं । “जैसा होना होगा , होगा” ऐसा सोचने वाले का विनाश हो जाता है ।
द्वावेतो सुखमेधते , यदभविष्यो विनश्यति ॥
— पंचतन्त्र
भविष्य का निर्माण करने वाला और प्रत्युत्पन्नमति ( हाजिर जबाब ) ये दोनो सुख भोगते हैं । “जैसा होना होगा , होगा” ऐसा सोचने वाले का विनाश हो जाता है ।
भविष्य के बारे में
पूर्वकथन का सबसे अच्छा तरीका भविष्य का निर्माण करना है ।
— डा. शाकली
— डा. शाकली
किसी भी व्यक्ति का
अतीत जैसा भी हो , भविष्य सदैव
बेदाग होता है।
— जान राइस
— जान राइस
तुलसी जसि भवतव्यता
तैसी मिलै सहाय।
आपु न आवै ताहिं पै ताहिं तहाँ लै जाय।।
—–गोस्वामी तुलसीदास
आपु न आवै ताहिं पै ताहिं तहाँ लै जाय।।
—–गोस्वामी तुलसीदास
करमगति टारे नाहिं रे
टरी ।
—–सन्त कबीर
—–सन्त कबीर
होनवार बिरवान के होत
चीकने पात।
—–अज्ञात
—–अज्ञात
आशा / निराशा / आशावाद /
निराशावाद
अरूणोदय के पूर्व सदैव
घनघोर अंधकार होता है.
नर हो न निराश करो मन
को ।
कुछ काम करो , कुछ काम करो ।
जग में रहकर कुछ नाम करो ॥
— मैथिलीशरण गुप्त
कुछ काम करो , कुछ काम करो ।
जग में रहकर कुछ नाम करो ॥
— मैथिलीशरण गुप्त
बाग में अफवाह के , मुरझा गये हैं
फूल सब ।
गुल हुए गायब अरे , फल बनने के लिये ॥
गुल हुए गायब अरे , फल बनने के लिये ॥
निराशा सम्भव को
असम्भव बना देती है ।
— प्रेमचन्द
— प्रेमचन्द
खुदा एक दरवाजा बन्द
करने से पहले दूसरा खोल देता है, उसे प्रयत्न
कर देखो |
– शेख सादी
– शेख सादी
निराशा मूर्खता का
परिणाम है।
- डिज़रायली
- डिज़रायली
मनुष्य के लिए निराशा
के समान दूसरा पाप नहीं है। इसलिए मनुष्य को पापरूपिणी निराशा को समूल हटाकर
आशावादी बनना चाहिए।
- हितोपदेश
- बर्नार्ड इगेस्किलन
- हितोपदेश
- बर्नार्ड इगेस्किलन
अगर तुम पतली बर्फ पर
चलने जा रहे हो तो हो सकता है कि तुम डांस भी करने लगो।
निराशावाद ने आज तक
कोई जंग नही जीती .
— ड्वाइन डी. आइसनहॉवर
— ड्वाइन डी. आइसनहॉवर
निराशावादीः एक ऐसा
इंसान जिसके पास अगर दो शैतान चुनने की च्वाइश हो तो वो दोनो चुनता है .
— आस्कर वाइल्ड
— आस्कर वाइल्ड
दो आदमी एक ही वक्त
जेल की सलाखों से बाहर देखते हैं, एक को कीचड़
दिखायी देता है और दूसरे को तारे .
— फ्रेडरिक लेंगब्रीज
— फ्रेडरिक लेंगब्रीज
निराशा के समान दूसरा
पाप नहीं। आशा सर्वोत्कृष्ट प्रकाश है तो निराशा घोर अंधकार है ।
— रश्मिमाला
— रश्मिमाला
हताश न होना सफलता का
मूल है और यही परम सुख है। उत्साह मनुष्य को कर्मो में प्रेरित करता है और उत्साह
ही कर्म को सफल बनता है ।
— वाल्मीकि
— वाल्मीकि
सम्भव / असम्भव / कठिन /
सरल
हर अच्छा काम पहले
असंभव नजर आता है.
जो आपको कल कर देना
चाहिए था, वही संसार का सबसे कठिन कार्य है |
– कन्फ्यूशियस
– कन्फ्यूशियस
चिन्ता / तनाव / अवसाद
चिन्ता एक प्रकार की
कायरता है और वह जीवन को विषमय बना देती है ।
— चैनिंग
— चैनिंग
रहिमन कठिन चितान तै , चिन्ता को चित
चैत ।
चिता दहति निर्जीव को , चिन्ता जीव समेत ॥
चिता दहति निर्जीव को , चिन्ता जीव समेत ॥
( हे मन तू चिन्ता के
बारे में सोच , जो चिता से भी
भयंकर है । क्योंकि चिता तो निर्जीव ( मरे हुए को ) जलाती है , किन्तु चिन्ता
तो सजीव को ही जलाती है । )
चिन्ता ऐसी डाकिनी , काट कलेजा खाय
।
वैद बेचारा क्या करे , कहाँ तक दवा लगाय ॥
— कबीर
वैद बेचारा क्या करे , कहाँ तक दवा लगाय ॥
— कबीर
आत्म-निर्भरता
जो आत्म-शक्ति का
अनुसरण करके संघर्ष करता है , उसे महान विजय
अवश्य मिलती है।
- भरत पारिजात ८।३४
- भरत पारिजात ८।३४
भारत
भारत हमारी संपूर्ण
(मानव) जाति की जननी है तथा संस्कृत यूरोप के सभी भाषाओं की जननी है : भारतमाता
हमारे दर्शनशास्त्र की जननी है , अरबॊं के
रास्ते हमारे अधिकांश गणित की जननी है , बुद्ध के
रास्ते इसाईयत मे निहित आदर्शों की जननी है , ग्रामीण समाज
के रास्ते स्व-शाशन और लोकतंत्र की जननी है । अनेक प्रकार से भारत माता हम सबकी
माता है ।
— विल्ल डुरान्ट , अमरीकी इतिहासकार
— विल्ल डुरान्ट , अमरीकी इतिहासकार
हम भारतीयों के बहुत
ऋणी हैं जिन्होने हमे गिनना सिखाया, जिसके बिना
कोई भी मूल्यवान वैज्ञानिक खोज सम्भव नही होती ।
— अलबर्ट आइन्स्टीन
— अलबर्ट आइन्स्टीन
भारत मानव जाति का
पलना है , मानव-भाषा की
जन्मस्थली है , इतिहास की
जननी है , पौराणिक कथाओं
की दादी है , और प्रथाओं की
परदादी है । मानव इतिहास की हमारी सबसे कीमती और सबसे ज्ञान-गर्भित सामग्री केवल
भारत में ही संचित है ।
— मार्क ट्वेन
— मार्क ट्वेन
यदि इस धरातल पर कोई
स्थान है जहाँ पर जीवित मानव के सभी स्वप्नों को तब से घर मिला हुआ है जब मानव
अस्तित्व के सपने देखना आरम्भ किया था , तो वह भारत ही
है ।
— फ्रान्सीसी विद्वान रोमां रोला
— फ्रान्सीसी विद्वान रोमां रोला
भारत अपनी सीमा के पार
एक भी सैनिक भेजे बिना चीन को जीत लिया और लगभग बीस शताब्दियों तक उस पर
सांस्कृतिक रूप से राज किया ।
— हू शिह , अमेरिका में चीन के भूतपूर्व राजदूत
— हू शिह , अमेरिका में चीन के भूतपूर्व राजदूत
यूनान, मिश्र, रोमां , सब मिट। गये
जहाँ से ।
अब तक मगर है बाकी , नाम-ओ-निशां हमारा ॥
कुछ बात है कि हस्ती , मिटती नहीं हमारी ।
शदियों रहा है दुश्मन , दौर-ए-जहाँ हमारा ॥
— मुहम्मद इकबाल
अब तक मगर है बाकी , नाम-ओ-निशां हमारा ॥
कुछ बात है कि हस्ती , मिटती नहीं हमारी ।
शदियों रहा है दुश्मन , दौर-ए-जहाँ हमारा ॥
— मुहम्मद इकबाल
गायन्ति देवाः किल
गीतकानि , धन्यास्तु ते
भारतभूमिभागे ।
स्वर्गापवर्गास्पद् मार्गभूते , भवन्ति भूयः पुरुषाः सुरत्वाद् ॥
स्वर्गापवर्गास्पद् मार्गभूते , भवन्ति भूयः पुरुषाः सुरत्वाद् ॥
देवतागण गीत गाते हैं
कि स्वर्ग और मोक्ष को प्रदान करने वाले मार्ग पर स्थित भारत के लोग धन्य हैं । (
क्योंकि ) देवता भी जब पुनः मनुष्य योनि में जन्म लेते हैं तो यहीं जन्मते हैं ।
एतद्देशप्रसूतस्य
सकासादग्रजन्मनः ।
स्व-स्व चरित्रं शिक्षेरन् पृथिव्यां सर्व मानवा: ॥
— मनु
स्व-स्व चरित्रं शिक्षेरन् पृथिव्यां सर्व मानवा: ॥
— मनु
पुराने काल में , इस देश ( भारत
) में जन्में लोगों के सामीप्य द्वारा ( साथ रहकर ) पृथ्वी के सब लोगों ने
अपने-अपने चरित्र की शिक्षा ली ।
संस्कृत
भारतस्य प्रतिष्ठे
द्वे संस्कृतम् संस्कृतिस्तथा ।
( भारत की प्रतिष्ठा दो चीजों में निहित है , संस्कृति और संस्कृत । )
( भारत की प्रतिष्ठा दो चीजों में निहित है , संस्कृति और संस्कृत । )
इसकी पुरातनता जो भी
हो , संस्कृत भाषा
एक आश्चर्यजनक संरचना वाली भाषा है । यह ग्रीक से अधिक परिपूर्ण है और लैटिन से
अधिक शब्दबहुल है तथा दोनों से अधिक सूक्ष्मता पूर्वक दोषरहित की हुई है ।
— सर विलियम जोन्स
— सर विलियम जोन्स
सभ्यता के इतिहास में , पुनर्जागरण के
बाद , अट्ठारहवीं
शताब्दी के उत्तरार्ध में संस्कृत साहित्य की खोज से बढकर कोई विश्वव्यापी महत्व
की दूसरी घटना नहीं घटी है ।
–आर्थर अन्थोनी मैक्डोनेल्
–आर्थर अन्थोनी मैक्डोनेल्
कम्प्यूटर को
प्रोग्राम करने के लिये संस्कृत सबसे सुविधाजनक भाषा है ।
— फोर्ब्स पत्रिका ( जुलाई , १९८७ )
— फोर्ब्स पत्रिका ( जुलाई , १९८७ )
यह लेख इस बात को
प्रतिपादित करता है कि एक प्राकृतिक भाषा ( संस्कृत ) एक कृत्रिम भाषा के रूप में
भी कार्य कर सकती है , और कृत्रिम
बुद्धि के क्षेत्र में किया गया अधिकाश काम हजारों वर्ष पुराने पहिये ( संस्कृत )
को खोजने जैसा ही रहा है ।
— रिक् ब्रिग्स , नासा वैज्ञानिक ( १९८५ में )
— रिक् ब्रिग्स , नासा वैज्ञानिक ( १९८५ में )
हिन्दी
हिन्दुस्तान की एकता
के लिये हिन्दी भाषा जितना काम देगी , उससे बहुत
अधिक काम देवनागरी लिपि दे सकती है ।
-— आचार्य विनबा भावे देवनागरी किसी भी लिपि
की तुलना में अधिक वैज्ञानिक एवं व्यवस्थित लिपि है ।
-— सर विलियम जोन्स
-— आचार्य विनबा भावे
-— सर विलियम जोन्स
मनव मस्तिष्क से निकली
हुई वर्णमालाओं में नागरी सबसे अधिक पूर्ण वर्णमाला है ।
— जान क्राइस्ट
— जान क्राइस्ट
उर्दू लिखने के लिये
देवनागरी अपनाने से उर्दू उत्कर्ष को प्राप्त होगी ।
-— खुशवन्त सिंह
-— खुशवन्त सिंह
महात्मा गाँधी
आने वाली पीढियों को
विश्वास करने में कठिनाई होगी कि उनके जैसा कोई हाड-मांस से बना मनुष्य इस धरा पर
चला था ।
— अलबर्ट आइन्स्टीन
— अलबर्ट आइन्स्टीन
मैं और दूसरे लोग
क्रान्तिकारी होंगे, लेकिन हम सभी
प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से महात्मा गाँधी के शिष्य हैं , इससे न कम न
ज्यादा ।
— हो ची मिन्ह
— हो ची मिन्ह
उनके अधिकांश
सिद्धान्त सार्वत्रिक-उपयोग वाले और शाश्वत-सत्यता वाले हैं ।
— यू थान्ट
— यू थान्ट
.. और फिर गाँधी नामक
नक्षत्र का उदय हुआ । उसने दिखाया कि अहिंसा का सिद्धान्त सम्भव है ।
— अर्नाल्ड विग
— अर्नाल्ड विग
जब तक स्वतंत्र लोग
तथा स्वतंत्रता और न्याय के चाहने वाले रहेंगे, तब तक महात्मा
गाँधी को सदा याद किया जायेगा ।
–हैली सेलेसी
–हैली सेलेसी
मेरे हृदय मैं महात्मा
गाँधी के लिये अपार प्रशंसा और सम्मान है । वह एक महान व्यक्ति थे और उनको
मानव-प्रकृति का गहन ज्ञान था ।
— महा आत्मा , दलाई लामा
— महा आत्मा , दलाई लामा
रामचरितमानस
मानसिक परिपक्वता /
भावनात्मक विवेक / इमोशनल इन्टेलिजेन्स
क्रोधो वैवस्वतो राजा , तृष्णा वैतरणी
नदी ।
विद्या कामदुधा धेनुः , संतोषं नन्दनं वनम ॥क्रोध यमराज है , तॄष्णा (इच्छा) वैतरणी नदी के समान है । विद्या कामधेनु है और सन्तोष नन्दन वन है । )
विद्या कामदुधा धेनुः , संतोषं नन्दनं वनम ॥क्रोध यमराज है , तॄष्णा (इच्छा) वैतरणी नदी के समान है । विद्या कामधेनु है और सन्तोष नन्दन वन है । )
चिन्ता चिता के पास ले
जाती है ।
आत्महत्या , एक अस्थायी
समस्या का स्थायी समाधान है ।
मन के हारे हार है मन
के जीते जीत ।
हमे सीमित मात्रा में
निराशा को स्वीकार करना चाहिये , लेकिन असीमित
आशा को नहीं छोडना चाहिये ।
— मार्टिन लुथर किंग
— मार्टिन लुथर किंग
अगर आपने को धनवान
अनुभव करना चाहते है तो वे सब चीजें गिन डालो जो तुम्हारे पास हैं और जिनको पैसे
से नहीं खरीदा जा सकता ।
हँसते हुए जो समय आप
व्यतीत करते हैं, वह ईश्वर के
साथ व्यतीत किया समय है.
सम्पूर्णता
(परफ़ेक्शन) के नाम पर घबराइए नहीं | आप उसे कभी भी
नहीं पा सकते |
-– सल्वाडोर डाली
-– सल्वाडोर डाली
सम्पूर्णता की
आकांक्षा एक पागल्पन है ।
जो मनुष्य अपने क्रोध
को अपने वश में कर लेता है, वह दूसरों के
क्रोध से (फलस्वरूप) स्वयमेव बच जाता है |
-– सुकरात
-– सुकरात
जब क्रोध में हों तो
दस बार सोच कर बोलिए , ज्यादा क्रोध
में हों तो हजार बार सोचकर.
-– जेफरसन
-– जेफरसन
यदि आप जानना चाहते
हैं कि ईश्वर रुपए-पैसे के बारे में क्या सोचता होगा, तो बस आप ऐसे
लोगों को देखें, जिन्हें ईश्वर
ने खूब दिया है.
-– डोरोथी पार्कर
-– डोरोथी पार्कर
जो भी प्रतिभा आपके
पास है उसका इस्तेमाल करें. जंगल में नीरवता होती यदि सबसे अच्छा गीत सुनाने वाली
चिड़िया को ही चहचहाने की अनुमति होती.
-– हेनरी वान डायक
-– हेनरी वान डायक
जन्म के बाद मृत्यु, उत्थान के बाद
पतन, संयोग के बाद वियोग, संचय के बाद
क्षय निश्चित है. ज्ञानी इन बातों का ज्ञान कर हर्ष और शोक के वशीभूत नहीं होते |
– महाभारत
– महाभारत
क्रोध सदैव मूर्खता से
प्रारंभ होता है और पश्चाताप पर समाप्त.
ज्ञानी पुरुषों का
क्रोध भीतर ही, शांति से
निवास करता है, बाहर नहीं |
– खलील जिब्रान
– खलील जिब्रान
क्रोध एक किस्म का
क्षणिक पागलपन है |
-– महात्मा गांधी
-– महात्मा गांधी
आक्रामकता सिर्फ एक
मुखौटा है जिसके पीछे मनुष्य अपनी कमजोरियों को, अपने से और
संसार से छिपाकर चलता है। असली और स्थाई शक्ति सहनशीलता में है। त्वरित और कठोर
प्रतिक्रिया सिर्फ कमजोर लोग करते हैं और इसमें वे अपनी मनुष्यता को खो देते हैं।
-फ्रांत्स काफ्का
-फ्रांत्स काफ्का
गोधन, गजधन, बाजिधन और
रतनधन खान।
जब आवै सन्तोष धन सब धन धूरि समान।।
—-सन्त कबीर
जब आवै सन्तोष धन सब धन धूरि समान।।
—-सन्त कबीर
संतोषं परमं सुखम् ।
( सन्तोष सबसे बडा सुख है )
( सन्तोष सबसे बडा सुख है )
यदि आवश्यकता आविष्कार
की जननी ( माता ) है , तो असन्तोष
विकास का जनक ( पिता ) है ।
रन बन ब्याधि बिपत्ति
में , रहिमन मरे न
रोय ।
जो रक्षक जननी-जठर , सो हरि गये कि सोय ॥
जो रक्षक जननी-जठर , सो हरि गये कि सोय ॥
सुख दुख इस संसार में , सब काहू को
होय ।
ज्ञानी काटै ज्ञान से , मूरख काटै रोय ॥
— कबीरदास
ज्ञानी काटै ज्ञान से , मूरख काटै रोय ॥
— कबीरदास
क्रोध ऐसी आंधी है जो
विवेक को नष्ट कर देती है ।
–अज्ञात
–अज्ञात
यदि असंतोष की भावना
को लगन व धैर्य से रचनात्मक शक्ति में न बदला जाये तो वह खतरनाक भी हो सकती है।
— इंदिरा गांधी
— इंदिरा गांधी
क्रोध , एक कमजोर आदमी
द्वारा शक्ति की नकल है ।
हे भगवान ! मुझे धैर्य दो , और ये काम अभी
करो ।
हँसी / खुशी / प्रसन्नता
/ हर्ष / विषाद / शोक / सुख / दुख
यदि बुद्धिमान हो , तो हँसो ।
विवेक की सबसे
प्रत्यक्ष पहचान सतत प्रसन्नता है ।
— मान्तेन
— मान्तेन
प्रकृति ने आपके भीतरी
अंगों के व्यायाम के लिये और आपको आनन्द प्रदान करने के लिये हँसी बनायी है ।
जब मैं स्वयं पर हँसता
हूँ तो मेरे मन का बोझ हल्का हो जाता है |
-– टैगोर
-– टैगोर
न कल की न काल की
फ़िकर करो, सदा हर्षित मुख रहो.
सुखं हि दु:खान्यनुभूय
शोभते घनान्धकारेमिवदीपदर्शनम्।
सुखातयोयाति नरोदरिद्रताम् धृत: शरीरेण मृत: स: जीवति।।
—-शूद्रक (मृच्छकटिक नाटक)
(सुख की शोभा दुःख के अनुभव के बाद होती है जैसे घने अंधकार में दीपक की। जो मनुष्य सुख से दुःख में जाता है वह जीवित भी मृत के समान जीता है।)
सुखातयोयाति नरोदरिद्रताम् धृत: शरीरेण मृत: स: जीवति।।
—-शूद्रक (मृच्छकटिक नाटक)
(सुख की शोभा दुःख के अनुभव के बाद होती है जैसे घने अंधकार में दीपक की। जो मनुष्य सुख से दुःख में जाता है वह जीवित भी मृत के समान जीता है।)
रहिमन विपदाहुँ भली , जो थोरेहु दिन
होय।
हित अनहित या जगत में , जानि परै सब कोय।।
—-रहीम
हित अनहित या जगत में , जानि परै सब कोय।।
—-रहीम
प्रसन्नता ऐसी कोई चीज
नही जो तुम कल के लिये पोस्टपोंड कर दो, यह तो वो है
जो हम अपने आज के लिये डिजाइन करते हैं .
— जिम राहं
— जिम राहं
जब तुम दु:खों का
सामना करने से डर जाते हो और रोने लगते हो, तो मुसीबतों
का ढेर लग जाता है। लेकिन जब तुम मुस्कराने लगते हो, तो मुसीबतें
सिकुड़ जाती हैं।
–सुधांशु महाराज
–सुधांशु महाराज
मुस्कान पाने वाला
मालामाल हो जाता है पर देने वाला दरिद्र नहीं होता ।
— अज्ञात
— अज्ञात
धैर्य / धीरज
धीरज प्रतिभा का
आवश्यक अंग है ।
— डिजरायली
— डिजरायली
सुख में गर्व न करें , दुःख में
धैर्य न छोड़ें ।
- पं श्री राम शर्मा आचार्य
- पं श्री राम शर्मा आचार्य
धीरे-धीरे रे मना , धीरे सब कुछ
होय ।
माली सींचै सौ घडा , ऋतु आये फल होय ॥
— कबीर
माली सींचै सौ घडा , ऋतु आये फल होय ॥
— कबीर
हास्य-व्यंग्य सुभाषित
हे दरिद्रते ! तुमको नमस्कार
है । तुम्हारी कृपा से मैं सिद्ध हो गया हूँ ।
(क्योंकि) मैं तो सारे संसार को देखता हूँ लेकिन मुझे कोई नहीं देखता ॥
(क्योंकि) मैं तो सारे संसार को देखता हूँ लेकिन मुझे कोई नहीं देखता ॥
कमला कमलं शेते , हरः शेते
हिमालये ।
क्षीराब्धौ च हरिः शेते , मन्ये मत्कुणशंकया ॥
क्षीराब्धौ च हरिः शेते , मन्ये मत्कुणशंकया ॥
लक्ष्मी कमल पर रहती
हैं , शिव हिमालय पर
रहते हैं ।
विष्णु क्षीरसागर में रहते हैं , माना जाता है कि खटमल के डर से ॥
विष्णु क्षीरसागर में रहते हैं , माना जाता है कि खटमल के डर से ॥
कमला थिर न रहीम जग , यह जानत सब
कोय ।
पुरुष पुरातन की बधू , क्यों न चंचला होय ॥
( कमला स्थिर नहीं है , यह सब लोग जानते हैं । बूढे आदमी ( विष्णु ) की पत्नी चंचला क्यों नहीं होगी ? )
पुरुष पुरातन की बधू , क्यों न चंचला होय ॥
( कमला स्थिर नहीं है , यह सब लोग जानते हैं । बूढे आदमी ( विष्णु ) की पत्नी चंचला क्यों नहीं होगी ? )
असारे अस्मिन संसारे , सारं श्वसुर
मन्दिरम् ।
क्षीराब्धौ च हरिः शेते , हरः शेते हिमालये ॥
( इस असार संसार में ससुराल ही सार वस्तु है । ( इसीलिये तो ) विष्णु क्षीरसागर में सोते हैं और शिव हिमालय पर । )
क्षीराब्धौ च हरिः शेते , हरः शेते हिमालये ॥
( इस असार संसार में ससुराल ही सार वस्तु है । ( इसीलिये तो ) विष्णु क्षीरसागर में सोते हैं और शिव हिमालय पर । )
सत्य को कह देना ही
मेरा मजाक का तरीका है। संसार मे यह सबसे विचित्र मजाक है।
–जार्ज बर्नाड शा
–जार्ज बर्नाड शा
टेलिविज़न पर जिधर
देखो कॉमेडी की धूम मची है . क्या वह गली मुहल्लों में भी कॉमेडी भर देगी ?
-– डिक कैवेट
-– डिक कैवेट
मेरे घर में मेरा ही
हुक्म चलता है. बस, निर्णय मेरी
पत्नी लेती है |
-– वूडी एलन
-– वूडी एलन
प्यार में सब कुछ
भुलाया जा सकता है, सिर्फ दो चीज़
को छोड़कर – ग़रीबी और
दाँत का दर्द |
-– मे वेस्ट
-– मे वेस्ट
चूंकि एक राजनीतिज्ञ
कभी भी अपने कहे पर विश्वास नहीं करता, उसे आश्चर्य
होता है जब दूसरे उस पर विश्वास करते हैं |
-– चार्ल्स द गाल
-– चार्ल्स द गाल
जालिम का नामोनिशां मिट
जाता है, पर जुल्म रह जाता है.
पुरुष से नारी अधिक
बुद्धिमती होती है, क्योंकि वह
जानती कम है पर समझती अधिक है.
इस संसार में दो तरह
के लोग हैं – अच्छे और
बुरे. अच्छे लोग अच्छी नींद लेते हैं और जो बुरे हैं वे जागते रह कर मज़े करते
रहते हैं |
-– वूडी एलन
-– वूडी एलन
अच्छा ही होगा यदि आप
हमेशा सत्य बोलें, सिवाय इसके कि
तब जब आप उच्च कोटि के झूठे हों |
-– जेरोम के जेरोम
-– जेरोम के जेरोम
किसी व्यक्ति को एक
मछली दे दो तो उसका पेट दिन भर के लिए भर जाएगा. उसे इंटरनेट चलाना सिखा दो तो वह
हफ़्तों आपको परेशान नहीं करेगा.
-– एनन
-– एनन
ईश्वर को धन्यवाद कि
आदमी उड़ नहीं सकता. अन्यथा वह आकाश में भी कचरा फैला देता.
-– हेनरी डेविड थोरे
-– हेनरी डेविड थोरे
यदि आप को 100 रूपए
बैंक का ऋण चुकाना है तो यह आपका सिरदर्द है. और यदि आप को 10 करोड़ रुपए चुकाना
है तो यह बैंक का सिरदर्द है.
-– पाल गेटी
-– पाल गेटी
विकल्पों की अनुपस्थिति
मस्तिष्क को बड़ा राहत देती है |
-– हेनरी किसिंजर
-– हेनरी किसिंजर
भीख मांग कर पीने से
प्यास नहीं बुझती
मुझे मनुष्यों पर पूरा
भरोसा है – जहां तक उनकी
बुद्धिमत्ता का प्रश्न है – कोका कोला
बहुत बिकता है बनिस्वत् शैम्पेन के.
— एडले स्टीवेंसन
— एडले स्टीवेंसन
यदि वोटों से परिवर्तन
होता, तो वे उसे कब का अवैध करार दे चुके होते.
यदि आप थोड़ी देर के
लिए खुश होना चाहते हैं तो दारू पी लें. लंबे समय के लिए खुश होना चाहते हैं तो
प्यार में पड़ जाएँ. और अगर हमेशा के लिए खुश रहना चाहते हैं तो बागवानी में लग
जाएँ.
-– आर्थर स्मिथ
-– आर्थर स्मिथ
अत्यंत बुद्धिमती औरत
ही अच्छा पति (बना) पाती है.
-– बालज़ाक
-– बालज़ाक
बिल्ली का व्यवहार तब
तक ही सम्मानित रह पाता है जब तक कि कुत्ते का प्रवेश नहीं हो जाता.
ऐसा क्यों होता है कि
कोई औरत शादी करके दस सालों तक अपने पति को सुधारने का प्रयास करती है और अंत में
शिकायत करती है कि यह वह आदमी नहीं है जिससे उसने शादी की थी.
-– बारबरा स्ट्रीसेंड
-– बारबरा स्ट्रीसेंड
बेचारगी महसूस करने से
बचने का सबसे बेहतरीन तरीका है कि खुद को इतना व्यस्त रखो कि कभी यह सोचने का समय
न मिले कि तुम खुश क्यों नही हो ?
जो अच्छा करना चाहता
है द्वार खटखटाता है, जो प्रेम करता
है द्वार खुला पाता है।
मैं ने कोई विज्ञापन
ऐसा नहीं देखा जिसमें पुरुष स्त्री से कह रहा हो कि यह साड़ी या स्नो खरीद ले।
अपनी चीज़ वह खुद पसंद करती है मगर पुरुष की सिगरेट से लेकर टायर तक में वह दखल
देती है।
- हरिशंकर परसाई
- हरिशंकर परसाई
दो-चार निंदकों को एक
जगह बैठकर निंदा में निमग्न देखिए और तुलना कीजिए दो-चार ईश्वर-भक्तों से, जो रामधुन लगा
रहें हैं। निंदकों की सी एकाग्रता, परस्पर
आत्मीयता, निमग्नता भक्तों में दुर्लभ है। इसीलिए संतों ने निंदकों को ‘आंगन कुटि छवाय’ पास रखने की
सलाह दी है।
धर्म
धृति क्षमा दमोस्तेयं
शौचं इन्द्रियनिग्रहः ।
धीर्विद्या सत्यं अक्रोधो , दसकं धर्म लक्षणम ॥
— मनु
( धैर्य , क्षमा , संयम , चोरी न करना , शौच ( स्वच्छता ), इन्द्रियों को वश मे रखना , बुद्धि , विद्या , सत्य और क्रोध न करना ; ये दस धर्म के लक्षण हैं । )
धीर्विद्या सत्यं अक्रोधो , दसकं धर्म लक्षणम ॥
— मनु
( धैर्य , क्षमा , संयम , चोरी न करना , शौच ( स्वच्छता ), इन्द्रियों को वश मे रखना , बुद्धि , विद्या , सत्य और क्रोध न करना ; ये दस धर्म के लक्षण हैं । )
श्रूयतां धर्म
सर्वस्वं श्रूत्वा चैव अनुवर्त्यताम् ।
आत्मनः प्रतिकूलानि , परेषाम् न समाचरेत् ॥
— महाभारत
( धर्म का सर्वस्व क्या है, सुनो और सुनकर उस पर चलो ! अपने को जो अच्छा न लगे, वैसा आचरण दूसरे के साथ नही करना चाहिये । )
आत्मनः प्रतिकूलानि , परेषाम् न समाचरेत् ॥
— महाभारत
( धर्म का सर्वस्व क्या है, सुनो और सुनकर उस पर चलो ! अपने को जो अच्छा न लगे, वैसा आचरण दूसरे के साथ नही करना चाहिये । )
धर्मो रक्षति रक्षितः
।
( धर्म रक्षा करता है ( यदि ) उसकी रक्षा की जाय । )
( धर्म रक्षा करता है ( यदि ) उसकी रक्षा की जाय । )
धर्म का उद्देश्य मानव
को पथभ्रष्ट होने से बचाना है ।
— श्रीराम शर्मा , आचार्य
— श्रीराम शर्मा , आचार्य
कथनी करनी भिन्न जहाँ
हैं , धर्म नहीं
पाखण्ड वहाँ है ॥
— श्रीराम शर्मा , आचार्य
— श्रीराम शर्मा , आचार्य
उसी धर्म का अब उत्थान , जिसका सहयोगी
विज्ञान ॥
— श्रीराम शर्मा , आचार्य
— श्रीराम शर्मा , आचार्य
धर्म , व्यक्ति एवं
समाज , दोनों के लिये
आवश्यक है।
— डा॰ सर्वपल्ली राधाकृष्णन
— डा॰ सर्वपल्ली राधाकृष्णन
धर्म वह संकल्पना है
जो एक सामान्य पशुवत मानव को प्रथम इंसान और फिर भगवान बनाने का सामर्थय रखती है ।
–स्वामी विवेकांनंद
–स्वामी विवेकांनंद
धर्म का अर्थ तोड़ना
नहीं बल्कि जोड़ना है। धर्म एक संयोजक तत्व है। धर्म लोगों को जोड़ता है ।
— डा शंकरदयाल शर्मा
— डा शंकरदयाल शर्मा
धर्म करते हुए मर जाना
अच्छा है पर पाप करते हुए विजय प्राप्त करना अच्छा नहीं ।
— महाभारत
— महाभारत
धर्मरहित विज्ञान
लंगडा है , और विज्ञान
रहित धर्म अंधा ।
— आइन्स्टाइन
— आइन्स्टाइन
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