Saturday, 26 July 2014

सुनो, दुनिया की लड़कियों...

सुनो, दुनिया की लड़कियों...
(महिला दिवस पर मेरी एक कविता)

दुनिया की लड़कियों 
क्या तुम्हे पता है आज महिला दिवस है/
तुम्हारे सम्मान और गरिमा के खयाल का एक खास दिन/
क्या तुम्हे पता है आज सरकार और समाज की नजर में बढ़ जाती है तुम्हारी इज्जत/
उन्हें फिक्र होती है तुम्हारी खास सुरक्षा और सुविधा की।

क्या तुम उठकर नहीं कह सकती कि ऐ दुनिया के मर्दों सुनो !
हर दिन हमारा है/
हर दिन महिलाओं का है/
सिर्फ एक दिन नहीं/
तुम रखो इस एक दिन को संभालकर अपने लिए
और मनाते रहो अपने मन का उत्सव हमारे छद्म सम्मान में, सुरक्षा में/
हम लड़कियां तो छेड़ेंगी तराना
अपनी आजादी का, संघर्ष का, सृजन का और नए नए सपनों का रोज/
हम करेंगे उत्सव-गान
निजता का, चुनाव का, प्रेम का और पूरी दुनिया को प्रेम करने की अपनी शक्ति का रोज/
हम करेंगे जयघोष
स्त्रीत्व की ऊंचाई का, सौंदर्य का और हर मोर्चे पर जीत का रोज/
महिला दिवस का हमें मत दो उपहार सिर्फ एक दिन/
देना है तो दो अपना साथ, सहयोग
और थोड़ा सा प्यार रोज।

कोई खुशी से देता है तो ठीक/
नहीं तो मत मांगो थोड़ा सा प्यार, दुलार और अपने लिए खास सहूलियत/
सोना, चांदी, हीरे-जवाहरात और सुरक्षा मत मांगो/
मांगो थोड़ा सा लोहा
और बना लो एक तलवार/
उसे लहराओ खुली सड़क पर
बसंत की चमचमाती धूप के बीच/
दुनिया को डराने के लिए नहीं/
ये बताने के लिए कि तुम हो एक जिंदा, खूबसूरत और खौलता हुआ वजूद/
दुर्गा, काली, भैरवी और भवानी की तरह/
दुनिया के मर्दों से ऊंची आवाज में कहो
हमारी चिंता मत करो/
हम आधी नहीं हैं
हम पूरी हैं इस ब्रह्मांड में/
यह ब्रह्मांड भी हमारा बनाया हुआ है/
हम लड़कियां न हों तो अधूरे हो तुम/
इस वसुंधरा पर सबसे बड़ा वरदान हैं हम।

दुनिया की लड़कियों
लेकिन कभी घमंड मत करना
अपने नारीत्व का परचम मत लहराना
तुम अपनी गरिमा में ही सबसे सुंदर हो
तुम लड़ो, खूब पढ़ो और आगे बढ़ो/
जाओ एवरेस्ट को चूम कर आओ/
हिमालय की चोटियों को भी इंतजार है तुम्हारे इरादे और हौसले का/
निकल पड़ो दुनिया को फतह करने
ये सारी दुनिया तुम्हारी है/
मत करो इंतजार उस दिन का
जब तुम्हें कोई अहसास दिलाए तुम्हारे होने का/
और साल में एक दिन तुम्हारे सम्मान में
कसीदे काढ़े, नए नए शब्द गढ़े और तुम्हे फुसलाए तरह तरह से/

जाओ दुनिया के उस छोर तक/
जहां धरती कभी नहीं मिलती सूरज से
और सूरज कभी नहीं मिलता धरती से
दुनिया की लड़कियों
लड़ो, खूब पढ़ो और आगे बढ़ो...
शब्दों में, आडंबर में और अनुष्ठान में मत फंसो....।
- कुमार सर्वेश

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