दूसरी दुनिया है या नहीं, फिलहाल इस सवाल को रहस्य के घूंघट में ही रहने देते हैं। अभी बात उस दुनिया की जिसमें हम सब रहते हैं। आखिर ये दुनिया क्या है? क्या दुनिया जिसे कहते हैं जादू का खिलौना है? मिल जाए तो मिट्टी है, खो जाए तो सोना है? या आनी जानी ,फानी है , दुनिया ये बेमानी है !! आदि शंकराचार्य कहते हैं कि 'ब्रह्म सत्यम , जगत मिथ्या.. जिवो ब्रह्मेव नापराह' ..क्या ये सारा जगत प्रपंच है, माया है? आखिर क्या है ये दुनिया? इस दुनिया का ओर-छोर कहां है? कोई नहीं जानता..लेकिन संसार के रहस्यमयी मुखड़े से घूंघट उठाने का दुस्साहस कुछ मनीषियों और गुरु-ज्ञानियों ने किया है... संसार का पर्दा हटाकर इन लोगों ने एक और दुनिया की तरफ संकेत किया है जो रहस्य, रोमांच और अनचखे रस से भरा है। इस ब्लॉग में हम ऐसे ही लोगों की दुनिया की बातें करेंगे और कुछ नया जोड़ने की कोशिश करेंगे...
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